बुधवार, 10 जनवरी 2024

सच समझें कॉन्वेंट का मतलब क्या है


 कान्वेंट शब्द पर गर्व न करें... 

सच समझें कॉन्वेंट का मतलब क्या है?https://twitter.com/nirveshky/status/1595628905494609921?t=Kjj7QomIXLZtE7W4Gd6v1A&s=19


‘काँन्वेंट’ ! सब से पहले तो यह जानना आवश्यक है कि, ये शब्द आखिर आया कहाँ से है, तो आइये प्रकाश डालते हैं।


ब्रिटेन में एक कानून था, " लिव इन रिलेशनशिप " बिना किसी वैवाहिक संबंध के एक लड़का और एक लड़की का साथ में रहना, तो इस प्रक्रिया के अनुसार संतान भी पैदा हो जाती थी तो उन संतानों को किसी चर्च में छोड़ दिया जाता था।


अब ब्रिटेन की सरकार के सामने यह गम्भीर समस्या हुई कि इन बच्चों का क्या किया जाए तब वहाँ की सरकार ने काँन्वेंट खोले अर्थात् जो बच्चे अनाथ होने के साथ-साथ नाजायज हैं , उनके लिए ये काँन्वेंट बने।


उन अनाथ और नाजायज बच्चों को रिश्तों का एहसास कराने के लिए उन्होंने अनाथालयो में एक फादर एक मदर एक सिस्टर की नियुक्ति कर दी क्योंकि ना तो उन बच्चों का कोई जायज बाप है ना ही माँ है। तो काँन्वेन्ट बना नाजायज बच्चों के लिए जायज।


इंग्लैंड में पहला काँन्वेंट स्कूल सन् 1609 के आसपास एक चर्च में खोला गया था जिसके ऐतिहासिक तथ्य भी मौजूद हैं और 

भारत में पहला काँन्वेंट स्कूल कलकत्ता में सन् 1842 में खोला गया था। परंतु तब हम गुलाम थे और आज तो लाखों की संख्या में काँन्वेंट स्कूल चल रहे हैं।


जब कलकत्ता में पहला कॉन्वेंट स्कूल खोला गया, उस समय इसे ‘फ्री स्कूल’ कहा जाता था, इसी कानून के तहत भारत में

कलकत्ता यूनिवर्सिटी बनाई गयी, बम्बई यूनिवर्सिटी बनाई गयी, मद्रास यूनिवर्सिटी बनाई गयी और ये तीनों गुलामी के ज़माने की यूनिवर्सिटी आज भी इस देश में हैं।


मैकाले ने अपने पिता को एक चिट्ठी लिखी थी बहुत मशहूर चिट्ठी है। उसमें वो लिखता है कि 

“इन कॉन्वेंट स्कूलों से ऐसे बच्चे निकलेंगे जो देखने में तो भारतीय होंगे लेकिन दिमाग से अंग्रेज होंगे। इन्हें अपने देश के बारे में कुछ पता नहीं होगा। इनको अपने संस्कृति के बारे में कुछ पता नहीं होगा। इनको अपनी परम्पराओं के बारे में भी कुछ पता नहीं होगा।


इनको अपने मुहावरे ही नहीं मालूम होंगे, जब ऐसे बच्चे होंगे इस देश में तो अंग्रेज भले ही चले जाएँ इस देश से अंग्रेजियत नहीं जाएगी।” उस समय लिखी चिट्ठी की सच्चाई इस देश में अब साफ़-साफ़ दिखाई दे रही है और उस एक्ट की महिमा देखिये कि हमें अपनी भाषा बोलने में शर्म आती है, अंग्रेजी में बोलते हैं कि दूसरों पर रुवाब पड़ेगा।


अरे ! हम तो खुद में हीन हो गए हैं। जिसे अपनी भाषा बोलने में शर्म हो, दूसरों पर क्या असर पड़ेगा ?

लोगों का तर्क है कि “अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है”।


दुनिया में 204 देश हैं और अंग्रेजी सिर्फ 11 देशों में ही बोली, पढ़ी और समझी जाती है, फिर ये कैसे अंतर्राष्ट्रीय भाषा है?  


शब्दों के मामले में भी अंग्रेजी समृद्ध नहीं दरिद्र भाषा है। इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी और ईसा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे। 

ईसा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी।

अरमेक भाषा की लिपि जो थी वो हमारे बंगला भाषा से मिलती जुलती थी। समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो गयी।


भारत देश में अब भारतीयों की मूर्खता देखिए…  


जिनके जायज माँ बाप भाई बहन सब हैं, वो काँन्वेन्ट में जाते है तो क्या हुआ एक बाप घर पर है और दूसरा काँन्वेन्ट में जिसे फादर कहते हैं। आज जिसे देखो काँन्वेंट खोल रहा है जैसे- "बजरंग बली काँन्वेन्ट स्कूल", माँ भगवती काँन्वेन्ट स्कूल"।  

अब इन मूर्खो को कौन समझाए कि, भईया माँ भगवती या बजरंग बली का काँन्वेन्ट से क्या लेना देना?


दुर्भाग्य की बात यह है कि, जिन चीजों का हमने त्याग किया अंग्रेजो ने वो सभी चीज़ों को पोषित और संचित किया फिर भी हम सबने उनकी त्यागी हुई गुलाम सोच को आत्मसात कर गर्वित होने का दुस्साहस किया।

आइए आगे से जब भी हमसे कोई आश्रय कॉन्वैंट स्कूल की बात कहेगा या करेगा तो उसे उपरोक्त तथ्यों से परिचित अवश्य कराएंगे।साभार ✍️🙏

                                         ✍️✍️✍️✍️निर्वेश क्रांतिकारी 

मंगलवार, 9 जनवरी 2024

ESW का मतलब सामान्य बर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोग. ESW केटेगिरी मे SC, OBC, ST, के किसी भी भारतीय ब्यक्ति को शामिल नही किया जाता है

बिस्तार 

साल 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण दिया था। इसके लिए संविधान में 103वां संशोधन किया किया था। इसके बाद से ही इस आरक्षण के खिलाफ विवाद खड़ा हो गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण बरकरार रखने पर अपनी मुहर लगा दी है। मामले की सुनवाई करते हुए पांच जजों वाली संवैधानिक पीठ ने EWS आरक्षण के पक्ष में 3: 2 के अंतर से अपना फैसला सुनाया। तीन न्यायाधीश ने अधिनियम को बरकरार रखने के पक्ष में जबकि चीफ जस्टिस और एक न्यायाधीश ने इसपर असहमति जताई। आइए अब जानते हैं सुप्रीम कोर्ट में ये मामला क्यों पहुंचा था? EWS आरक्षण का फायदा किन्हें मिलेगा?

EWS का मतलब है आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण। यह आरक्षण सिर्फ जनरल कैटेगरी यानी सामान्य वर्ग के लोगों के लिए है। इस आरक्षण से SC, ST, OBC को बाहर किया गया है। दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र की मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण दिया था। इसके लिए संविधान में 103वां संशोधन किया किया था। वैसे कानूनन, आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अभी देशभर में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को जो आरक्षण मिलता है, वो 50 फीसदी सीमा के भीतर ही है। मामला यहीं फंस गया था कई लोगों को आपत्ति थी कि सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण मिलने से यह करीब 60 फीसदी के बराबर हो जाएगा जो कि संविधान को घोर उल्लंघन है। केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 40 से ज्यादा याचिकाएं दायर हुई थीं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 27 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इसके अलावा फरवरी 2020 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पांच छात्रों ने भी आरक्षण के खिलाफ याचिका दायर की थी।  


50 फीसदी सीमा में किसे कितना आरक्षण, केंद्र सरकार ने दी सफाई

50 फीसदी सीमा में ओबीसी को 27 फीसदी, एससी को 15 फीसदी और एसटी को 7.5 फीसदी आरक्षण मिला है। लेकिन सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण मिलने से यह सीमा 59.5 फीसदी हो जाती है। लेकिन केंद्र सरकार ने इसपर सफाई देते हुए कहा था कि आरक्षण के 50% बैरियर को हमने नहीं तोड़ा है क्योंकि 1992 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ही कहा था कि 50% से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए ताकि बाकी 50% जगह सामान्य वर्ग के लोगों के लिए बची रहे। यह आरक्षण 50% में आने वाले सामान्य वर्ग के लोगों के लिए ही है। यह बाकी के 50% वाले ब्लॉक को डिस्टर्ब नहीं करता है।

                       ✍️✍️✍️✍️✍️निर्वेश क्रांतिकारी 


सोमवार, 8 जनवरी 2024

इसे कहते है भक्ती की आड़ मे बिजनेस

 

इसे कहते है भक्ती की आड़ मे बिजनेस ✍️✍️✍️

ये कोई इत्तेफ़ाक़ नही बल्कि मोदी सरकार की साजिस है

एक तरफ राम मंदिर के नाम पर लोगों के बीच अपने राम भक्त होने का प्रचार कर रहे है.

और राममंदिर की आड़ मे उस बन को काट रहे है जिसमे भगवान राम ने बनबास के समय 10 साल गुजारें थे.

मंगलवार, 26 दिसंबर 2023

UPP कॉस्टेबल भर्ती अभ्यर्थीयों को 3 साल अतिरिक्त छूट

 


     UPP कॉस्टेबल भर्ती अभ्यर्थीयों को 3 साल अतिरिक्त छूट 

 सामान्य पुरुष उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु अब 25 वर्ष है

जबकि महिलाओं के लिए यह 28 वर्ष है।


इसी प्रकार, आरक्षित श्रेणी के छात्रों के लिए, पुरुषों और महिलाओं

के लिए अधिकतम आयु सीमा क्रमशः 30 और 33 वर्ष कर दी गई है।

भर्ती देखने वाले युवाओं के लिए उप्र सरकार की तरफ से एक और

मौका दिया है 

शुक्रवार, 22 दिसंबर 2023

15.लाख का सपना दिखा कर बीजेपी PM नरेंद्र मोदी जी ने 1.4 लाख का बना दिया कर्ज दार


 मोदी सरकार ने देश पर कर्ज बढ़ा द‍िया.

जब मोदी जी सरकार मे आए उससे पहले मोदी जी ने सभी नागरिक के लिए 15 लाख रु मिलने का सपना दिखाया और अव 

देश के हर नागर‍िक पर 1 लाख 40 हजार का कर्ज लाद द‍िया.

बीजेपी सरकार को लगता है, इस बात से देश पर कोई फर्क नही पड़ेगा.

लेकिन आने वाले समय मे सायद कोई आपत्ति आने पर कोई विश्वास करें.

क्योंकि देश की जनता से PM केयर फण्ड के नाम इकट्ठा किया हुआ पैसा का जनता को ही नही मालूम क्या हुआ.

तो सायद अव जनता से चंदा किसी सरकारी आपत्ति के नाम पर मिल सके.

कुल मिलाकर अव जनता पूर्ण रूप से आपत्ति समय मे भी आत्म निर्भर है.

जो की मौजूद बीजेपी के प्रधानमंत्री जी का एक सपना था.

वो लगभग साकार हो चूका है 

बुधवार, 20 दिसंबर 2023

PMO ने अग्निवीर स्कीम को सेना पर ज़बरदस्ती थोपा था, पूर्व सेनाध्यक्ष का खुलासा !!

 PMO ने अग्निवीर स्कीम को सेना पर ज़बरदस्ती थोपा था, पूर्व सेनाध्यक्ष का खुलासा !! 


अग्निवीर स्कीम PMO द्वारा देश व सेना के साथ एक धोखा या शायद एक साजिश !!


पूर्व सेना प्रमुख जनरल M.N. नरवाने ने अपनी किताब "फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी" में किया खुलासा !


"PMO से अग्निवीर योजना के ऐलान से तीनों सेनाएं चौंक गई थी ! नौसेना और वायु सेना के लिए तो ये सूचना एक झटके की तरह आई !"


उन्होंने आगे लिखा कि "जो सैनिक देश के लिए जान देता है, उसकी सैलरी की तुलना दिहाड़ी मज़दूर से नहीं की जा सकती, सेना की मज़बूत सिफारिश के बाद इसे 20,000/- मासिक से बढ़ाकर 30,000/- मासिक किया गया।" 


लेकिन रेगुलर की तनख्वाह 45000 है, अग्निवीर व रेगुलर सैनिक के बीच ये भेदभाव घातक सिद्ध होगा। 


प्रश्न ये हैं कि-


➡️ PMO (प्रधानमंत्री कार्यालय) ने अग्निपथ स्कीम को भारतीय सेना व तीनों सेना प्रमुखों को बिना बताए व बिना पायलट प्रोजेक्ट किए, क्यों लागू किया ?


➡️ सेना पर ये स्कीम, जो न देशहित में है, न ही युवाओं के हित में है, फिर भी क्यों थोपी गई ?


➡️ क्या ये स्कीम देश की सुरक्षा प्रणाली के साथ खिलवाड़ नहीं है ?


➡️ जब ये स्कीम देश की सुरक्षा, सेना व युवाओं के हित में नहीं है तो इसे क्यों न तुरंत प्रभाव से बंद कर किया जाए !


सोमवार, 4 सितंबर 2023

विश्व कप के लिए भारत की टीम


निर्वेश क्रांतिकारी ✍️✍️✍️

बल्लेबाज: रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव।
विकेटकीपर: केएल राहुल, ईशान किशन।
ऑलराउंडर: हार्दिक पांड्या  (उपकप्तान), रवींद्र जडेजा, अक्षर पटेल, शार्दुल ठाकुर।
गेंदबाज: जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज, कुलदीप यादव।

पंचायत चुनाव पर यूपी सरकार का बड़ा फैसला, हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करेगी योगी सरकार

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सरकार अपील दायर करेगी,...